Friday, August 20, 2010

सुख-दुख

सुख तो सौरभ है दो दिन का ,

दुख दो पल की धूल है ।

इनको अपनी नियति समझना

ही जीवन की भूल है ।

-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

1 comment:

युग-चेतना said...

बहुत प्रेरणादायक पंक्तियां हैं। आपका हार्दिक आभार।