Wednesday, October 19, 2011

चोका में बहना


जनम मिले
मुझे जब जग में
तुम हो बहना
हो चाहे प्रलय भी
साथ न छूटे
हम दोनों का कभी
हाथ न छूटे
मैं रहूँ ॠणी सदा
तेरे प्यार का
बँधा ही रहूँ सदा
स्नेह -डोर से
हृदय  के छोर से
तुम पावन
मेरी मनभावन,
मेरा गहना
सुख-दुख में मेरे
गले  लगे रहना


'हिमांशु '

2 comments:

युग-चेतना said...

सहेजूँ कैसे .... छलके छलके है ...भाई का नेह ..

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

बहुत सुन्दर रचना .. भाई बहन के स्नेह पर